ध्वनि प्रदूषण पर निबंध, Dhwani Pradushan Essay in Hindi, Short, Long Essay in Hindi, Hindi Anuched for Class 6, 7, 8, 9, 10, and 12 Students.

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

Dhwani Pradushan Essay in Hindi

ध्वनि प्रदूषण वो औद्योगिक या गैर-औद्योगिक क्रियाएं हैं जो मनुष्य, पौधो और पशुओं के स्वास्थ्य पर बहुत से आयामों से विभिन्न ध्वनि स्त्रोतों के द्वारा आवाज पैदा करके प्रभावित करती है। निरंतर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के स्तर ने वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के जीवन को बड़े खतरे पर रख दिया है। हम नीचे ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोतों, प्रभावों और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिये वैधानिक आयामों पर चर्चा करेंगे।

ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत निम्न लिखित हैं

भारत में बहुत अधिक ध्वनि प्रदूषण शहरीकरण, आधुनिक सभ्यता, औद्योगिकीकरण आदि के द्वारा बढ़ा है। ध्वनि का प्रसार औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोतों के कारण हुआ है। ध्वनि के औद्योगिक स्त्रोतों में तेज गति से काम करने वाली उच्च तकनीकी की बड़ी मशीनें और बहुत से उद्योगों में ऊंची आवाज पैदा करने वाली मशीनें शामिल हैं। ध्वनि पैदा करने वाले गैर-औद्योगिक स्त्रोतों में यातायत के साधन, परिवहन और अन्य मानव निर्मित गतिविधियाँ शामिल हैं। ध्वनि प्रदूषण के कुछ औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोत नीचे दिये गये हैं:

वायु सेना के एयर क्राफ्ट पर्यावरण में बहुत बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।
सड़क पर चलने वाले परिवहन के साधन दिन प्रति दिन मोटर वाहनों जैसे ट्रक, बसों, ऑटो, बाइक, वैयक्तिक कार आदि अधिक आवाज उत्पन्न करने लगें हैं। शहरों की बड़ी इमारतें अपने निर्माण के समय में कुछ समय के लिये अपने आस-पास के क्षेत्र में ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
विनिर्माण उद्योगों में मोटर और कम्प्रशेर, पंखे आदि के प्रयोग के कारण उत्पन्न औद्योगिक शोर।
बड़ी इमारतों, सड़को, हाई-वे, शहर की सड़कों आदि के निर्माण के समय हथौड़े, बुलडोजर, एयर कम्प्रेशर, डम्पिंग ट्रक, लोडर आदि के माध्यम से उत्पन्न निर्माणी ध्वनि।
रेल की पटरियों का शोर (ट्रेन के लोकोमोटिव इंजन, सीटी, हार्न, रेलवे फाटक को उठाते और गिराते समय) उच्च स्तर के शोर का निर्माण करने में बहुत प्रभावी होता है क्योंकि ये चरम सीमा की ध्वनि लगभग 120 डीबी से 100 फीट की दूरी तक की आवाज पैदा करते हैं।
इमारतों में प्लम्बिंग, जैनरेटर, ब्लोअर, घरेलू उपकरणों, संगीत, एयर कंडीशनर, वैक्यूम क्लिनर, रसोइघर के उपकरण, पंखों और अन्य गतिविधियों के कारण उत्पन्न शोर।
ध्वनि प्रदूषण का एक अन्य स्त्रोत विभिन्न किस्मों के पटाखों का त्योहारों और अन्य पारिवारिक उत्सवों के दौरान प्रयोग है।
ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव निम्नलिखित हैं

ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों, जानवरों और सम्पत्ति के स्वास्थ्य को बहुत अधिक प्रभावित करता है। उनमे से कुछ निम्न है:

दिन प्रति दिन बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों की काम करने की क्षमता और गुणवत्ता को कम करता है।
ध्वनि प्रदूषण थकान के कारण एकाग्रता की क्षमता को बड़े स्तर पर कम करता है।
गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है और चिड़चिड़ेपन और गर्भपात का कारण बनता है।
लोगों में बहुत सी बीमारियों (उच्च रक्तदाब और मानसिक तनाव) का कारण होता है क्योंकि मानसिक शान्ति को भंग करता है।
तेज आवाज काम की गुणवत्ता को कम करती है और जिसके कारण एकाग्रता का स्तर कम होता है।
यदि आवाज का स्तर 80 डीबी से 100 डीबी हो तो यह लोगों में अस्थायी या स्थायी बहरेपन का कारण बनता है।
यह ऐतिहासिक इमारतों, पुरानी इमारतों, पुलों आदि को हानि पहुंचाता है क्योंकि ये संरचना में बहुत कमजोर होती है और तेज ध्वनि खतरनाक तरंगों का निर्माण करती है जो उनकी दिवारों को हानि पहुंचाती है।
पशु अपने मस्तिष्क पर अपना नियंत्रण खो देते हैं और बहुत खतरनाक हो जाते हैं क्योंकि तेज आवाज उनके नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को प्रभावित करती है।
यह पेड़-पौधों को भी प्रभावित करता है और जिसके कारण खराब किस्म का उत्पादन होता है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिये वैधानिक कदम निम्नलिखित है:

भारत के संविधान ने जीवन जीने, सूचना प्राप्त करने, अपने धर्म को मानने और शोर करने के अधिकार प्रदान किये हैं।
धारा 133 ने नागरिकों को शक्ति प्रदान की हैं कि वो सशर्त और स्थायी आदेश पर पब्लिक प्रदर्शन को हटा सकती है।
पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1996 के अन्तर्गत ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम 2000 को ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती हुई समस्या को नियंत्रित करने के लिये शामिल किया है।
ध्वनि की कमी और तेल की मशीनरी का कारखाना अधिनियम कार्यस्थल पर शोर को नियंत्रित करता है।
मोटर वाहन अधिनियम हार्न और खराब इंजन के इस्तेमाल को शामिल करता है।
भारतीय दंड संहिता ध्वनि प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों से संबंधित है। किसी को भी ट्रोट कानून के अन्तर्गत दंडित किया जा सकता है।

 

निष्कर्ष

ध्वनि प्रदूषण ने इसके स्त्रोत, प्रभाव और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपायों के बारे में सामान्य जागरुकता की तत्काल आवश्यकता का निर्माण किया है। कार्यस्थल, शैक्षणिक संस्थान, आवासीय क्षेत्र, अस्पताल आदि स्थानों पर ध्वनि का तेज स्तर रोका जाना चाहिये। युवा बच्चों और विद्यार्थियों को तेज आवाज करने वाली गतिविधियों जैसे; किसी भी अवसर पर तेज आवाज पैदा करने वाले उपकरणों और यंत्रो का प्रयोग आदि में शामिल न होने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। तेज आवाज करने वाले पटाखों के विशेष अवसरों जैसे; त्योहारों, पार्टियों, शादियों, आदि में प्रयोग को कम करना चाहिये। ध्वनि प्रदूषण से संबंधित विषयों को पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जाये और विद्यालय में विभिन्न गतिविधियों जैसे लेक्चर, चर्चा आदि को आयोजित किया जा सकता है, ताकि नयी पीढ़ी अधिक जागरुक और जिम्मेदार नागरिक बन सके।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.