मेरा प्रिय मित्र पर निबंध , Mera Priya Mitra Essay in Hindi, Short, Long Essay in Hindi, Hindi Anuched for Class 6, 7, 8, 9, 10, and 12 Students.

मेरा प्रिय मित्र पर निबंध 

Mera Priya Mitra Essay in Hindi

                 मेरे जीवन में हमेशा से एक दोस्त रहा है जिसका नाम आशुतोष है। मेरे जीवन में वो कुछ खास है जो मेरी हर मुश्किल समय में मेरी मदद करता है। वो कोई ऐसा है जो मुझे सही रास्ता दिखाता है। अपने व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उसके पास मेरे लिये हमेशा समय रहता है। वो मेरा पड़ोसी है इसी वजह से स्कूल बीत जाने के बावजूद भी हम दोस्त हैं। जब भी हमें स्कूल से छुट्टी मिलती है हम लोग साथ में पिकनिक पर जाते हैं। हम दोनों अपने त्योहारों को एक-दूसरे के साथ और परिवार के साथ मनाते हैं। हम लोग रामलीला मैदान में एक-साथ रामलीला मेला देखने जाते हैं और बहुत मस्ती करते हैं। हम दोनों स्कूल के पाठ्येतर क्रियाकलापों में हमेशा भाग लेते हैं। हम दोनों घर पर क्रिकेट और कैरम खेलना पसंद करते हैं। वो मेरे लिये एक दोस्त से भी बढ़ कर है क्योंकि वो हमेशा मुझे सही रास्ता दिखाता है जब भी मैं कठिन परिस्थितियों में रहता हूँ।

                 वो मेरे जीवन में बहुत खास है। मैं उसके बिना कुछ नहीं करता। वो हमेशा एक अच्छे मूड में रहता है और गलत रास्तों से कभी समझौता नहीं करता है। वो हमेशा सही चीजें करता है और क्लास में भी सभी को सही कार्य करने के लिये प्रेरित करता है। वो अपने कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराता रहता है और कभी भी अपने परेशानियों को अपने चेहरे पर नहीं आने देता है। वो एक अच्छा सलाहकार है कुछ भी समझाना उसे पसंद है। वो अपने माता-पिता, दादा-दादी और दूसरे पारिवारिक सदस्यों का ध्यान रखता है। वो हमेशा उनकी और समाज के दूसरे बुढ़े लोगों की आज्ञा का पालन करता है। मैं उससे पहली बार मिला जब मैं पाँचवीं कक्षा में था और अभी हम दोनों आठवीं कक्षा के एक ही वर्ग में पढ़ते हैं।

                वो बहुत लंबा है और मेरे दूसरे सहपाठियों से बहुत अलग दिखता है। एक बार मैं कुछ कारणों से बहुत दुखी हो गया था। मैं कक्षा 6 की सभी ज़रुरी किताबें नहीं खरीद सकता था। उसने मुझसे पूछा, क्या हुआ तो मैं उसे अपनी पूरी कहानी सुनाई। उसने कहा कि इतनी छोटी सी बात के लिये तुम इतने दिन से दुखी हो। वो हंसने लगा और कहा कि घबराओ मत मैं स्कूल और घर में तुम्हारे साथ सभी किताबें साझा कर सकता हूँ। तुम्हें पूरे साल भर एक भी किताब खरीदने की जरुरत नहीं है। इसके बाद उसने मुझे अपने चुटकुले और कहानियों के द्वारा हँसाया। मैं उस पल को कभी नहीं भूल सकता जब उसने मेरी मदद की और वो हमेशा मेरी मदद को तैयार रहता है। वो बहुत व्यवहारिक है और कभी-भी व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को मिलाता नहीं है। वो हमेशा मेरी गणित के प्रश्नों को हल करने में मदद करता है। हमारी पसंद और नापसंद अलग है फिर भी हम दोनों सबसे अच्छे दोस्त हैं।

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